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Ramandeep
10 Apr 2019 . 1 min read

सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस: असहनीय पीड़ा से बाधित जीवन


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कुछ वर्षों पहले तक जिन बिमारियों के बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था आज वे हमारी ज़िन्दगी का हिस्सा बनती जा रहीं हैं। ये शारीरिक समस्यायें जैसे जॉइंट पेन, बैक पेन, सर्वाइकल आदि इतनी दर्दनाक होती हैं कि जिसे सहन करना लगभग नामुनकिन ही हो जाता है।

शरीर पर लगी चोट अथवा बुखार आदि को देख कर या माप कर बीमारी की स्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता है पर दर्द की तीव्रता का अंदाज़ा केवल दर्द सहने वाला ही लगा सकता है, देखने वाले उनके दुःख को ज़रा भी भांप नहीं सकते।

इसी तरह की एक बहुत परेशान करने वाली बीमारी है सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस, यह एक हड्डियों से जुड़ी समस्या है। यह बीमारी कंधों, गर्दन आदि में गंभीर दर्द देती है, और यह समस्या किसी को भी हो सकती है। वर्तमान समय में अनियमित दिनचर्या और अनिश्चित जीवनशैली के चलते अधिकतम लोग सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस के शिकार हैं। इसलिए हम सभी को सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस की वजह, लक्षण और इसके आसान घरेलू उपचार की जानकारी होनी ही चाहिए।

क्या है सर्वाइकल स्पॉन्डिल्यासीस?

सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस गर्दन और रीढ़ की हड्डी की बीमारी है । यह बीमारी आम तौर पर गर्दन झुका कर काम करने वालों को होती है। ओफिस में बैठकर गर्दन झुका कर कई घंटों लगातार काम करने वाले, लगातार एक स्थिति में पढ़ने वाले या टेबल-कुर्सी पर बैठ कर काम करने वाले अधिकतर लोग सर्वाइकल स्पॉन्डिल्यासीस के शिकार हो जाते हैं। दूसरी ओर आजकल स्मार्ट फोन पर देर तक गर्दन झुकाकर, सर और गर्दन को अनुचित पोस्चर में रखने से भी सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस की शिकायत बहुत बढ़ रही है।

वैज्ञानिक तथ्य एवं कारण:

  • सर्वाइकल स्पॉन्डिल्यासीस बढ़ती उम्र के साथ रीढ़ की हड्डी के जोड़ो में उपस्थित कुशन में होने वाले अनुचित बदलावों के कारण होता है ।
  • बाजुओं में कमजोरी महसूस होना और गर्दन में हर समय रहने वाली ऐठन सर्वाइकल स्पॉन्डिल्यासीस की ओर इशारा करती है ।
  • ऐसा देखा गया है कि 40 की उम्र के बाद रीढ़ की हड्डी के बीच उपस्थित कुशन कमज़ोर हो जाती है और रीढ़ की हड्डी का लचीलापन भी कम हो जाता है, इससे नस पर दबाव आता है और असहनीय दर्द, संवेदनशून्यता, झनझनाहट, कमजोरी आदि महसूस होती हैं।
  • एक ही मुद्रा में लंबे समय तक सर्वाइकल वर्टिब्रा यानि गर्दन की हड्डी के इस्तेमाल से दो हड्डियों के बीच की खाली जगह कम हो जाती है और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी मांसपेशियों में बाधा आने से गर्दन व उसके आसपास दर्द होने लगता है, जो आगे चलकर सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस बन जाता है। इसका सही समय पर सही उपचार अति आवश्यक है।

निम्नलिखित कारणों से भी सर्वाइकल स्पान्डिलाइटस होने की संभावना बढ़ सकती है :

  • व्यवसायिक कारण: सिर पर भारी वजन उठाना जैसे कुली, मजदूरी, नृत्य करना, बहुत वजनदार कसरत करना, सिलाई कढ़ाई करना, बारीकी से गहने बनाना आदि।
  • जेनेटिकल कारण: जब परिवारों में पीढ़ी दर पीढ़ी कोई रोग चला आता है तो ये आनुवंशिक कारण कहलाते हैं और आनुवंशिकता ईश्वर की देन है उससे भागा नहीं जा सकता। सर्वाइकल स्पान्डिलाइटस भी आनुवंशिकता से हो सकता है।
  • पोस्चर और आदतें: लगातार सिर झुकाकर काम करना, लंबी दूरी का सफर करते हुए बैठे बैठे सो जाना, टेलीफोन को कन्धे के सहारे रखकर लंबे समय तक बात करना आदि से सर्वाइकल स्पान्डिलाइटस का खतरा बढ़ जाता है।

क्विक ट्रिक्स :

  • जब लंबे समय तक एक ही अवस्था में बैठकर या झुककर काम करना हो तो समय-समय पर ब्रेक जरूर लें ताकि मांसपेशियों को राहत मिल सके और जकड़न दूर हो सके।
  • यदि आपको आगे की ओर झुककर काम करना होता है, तो काम के बाद कुछ देर पीछे की ओर झुककर व्यायाम अवश्य करें।
  • यदि आपको निरंतर गर्दन में दर्द होता है तो डॉक्टर की सलाह से गर्दन का एक्स-रे करवा लें।
  • यदि आपको सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस हो ही गया है तो सही उपचार लें और व्यायाम करें, जरूर आराम मिलेगा।
  • जब हमारा शरीर किसी रोग से झूझने लग जाता है तो इसे जीवन का विराम न मानते हुए अपनी जीवन शैली में उचित परिवर्तन करने से ही हम अपना जीवन सुचारु रूप से जी सकते है।

क्या हैं सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस के प्रमुख लक्षण?

  • रह रहकर गर्दन और कधों में भीषण दर्द का होना और इस दर्द का चिरकालिक रहना सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस की दस्तक है।
  • धीरे धीरे गर्दन में दर्द के साथ साथ मासपेशियों में अकड़न भी आने लगती है ।
  • कई दफा यह दर्द तेजी से कंधों से सर की ओर फैल जाता है ।
  • कुछ मरीजों में यह दर्द पीठ में भी असर डालने लगता है और फिर कंधों से होकर हाथों और उंगलियो तक भी महसूस होने लगता है।
  • सर के पिछले हिस्से में बहुत दर्द होता है।
  • अचानक ही गर्दन और कन्धे में सनसनी होना भी सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस का लक्षण है ।
  • कभी कबार असामान्य लक्षण भी देखे जाते हैं जैसे कि छाती में दर्द होना। जाँच करते वक्त पाए जाने वाले लक्षण:
  • गर्दन घुमाने में बहुत मुश्किल होना।
  • गर्दन की मासपेशियों में अकड़न रहना।
  • गंभीर स्थिति में गर्दन और हाथों की मांसपेशियों में असामान्य कमजोरी का पाया जाना।

सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस से निदान

सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस एक गंभीर रोग है इसलिए इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। इसके लक्षणों को भांपते ही तुरंत वैज्ञानिक मूल्यांकन बहुत आवश्यक है । इस रोग की पुष्टि करने के लिए कुछ जाँचें की जा सकती है। जैसे:

  • गर्दन का एक्सरे: एक्सरे करवाने से रीढ़ की हड्डी में उभरे हुए नुक्स नजर आ जाते है ।
  • MRI (Magnetic Resonance Imaging) : इस अध्भुत जाँच से सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस का निदान निश्चित किया जा सकता है। इस जांच के माध्यम से यह भी पता लगाया जा सकता है की नस पर दबाव असल में कहाँ पड़ रहा है और पड़ भी रहा है या नहीं ।
  • EMG (Electromyography) : यह जांच ग्रसित स्थान पर नसों की जड़ों में हुए नुक़सान को भांपने में बहुत मदद करती है।

क्या है सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस का सही उपचार?

#1. औपचारिक उपचार:

तज़ुर्बेजाकर डॉक्टर्स की सलाह से दर्द कम करने की एलोपैथिक दवाईयों के सेवन से शरीर को आराम मिल जाता है और सभी काम सुचारु रूप से कर पते हैं। गर्दन के आस पास की मांसपेशियों में हो रही ऐंठन को कम करने के लिए भी ये दवाईयाँ बहुत सहायक रहतीं हैं। -इसके अतिरिक्त मेडिकेटिड गर्दन की बेल्ट के प्रयोग से गर्दन की हरकतों को नियंत्रित रखा जा सकता है और दर्द में आराम मिलता है। -ऑपरेशन्स की मदद से नस पर पड़ते हुए दबाव को कम किया जाता है।

#2. Physiotherapy:

इस प्रक्रिया से मरीज़ की बीमारी को लम्बे समय तक बने रहने से रोकता है, साथ ही दवाइयों की मात्रा भी कम हो जाती है। यहाँ तक की सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस की असहनीय पीड़ा को दोबारा होने से भी रोकता है।

जीवनशैली में उचित बदलाव :

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटस के लक्षणों की पुष्टि हो जाने के बाद मरीज़ को अपनी जीवनशैली में कुछ उचित बदलाव कर लेने चाहिए। जिन कामों को करने से दर्द महसूस होता हो या उस काम को करने के कुछ समय बाद दर्द होता हो उन सभी का परहेज़ करना अति आवश्यक हैं। कुछ ऐसे काम जिनको अपने जीवन का हिस्सा बना लिया जाये तो दर्द में आराम मिल सके और शायद धीरे धीरे बीमारी बिलकुल ही ठीक हो सके उन्हें अपने जीवन में बिना देर किये शामिल कर लेना चाहिए।

क्या करें :

  • गर्दन से सम्बंधित योग और व्यायाम को अपने जीवन का अटूट हिस्सा बना लीजिये। इनसे गर्दन की मांसपेशियों को मजबूती और फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है।
  • सोते समय तकिये का प्रयोग तो छोड़ ही देना चाहिए। अगर आदत बदलने में मुश्किल हो रही हो तो पतला तकिया लें या सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस के लिए विशेष मेडिकेटेड तकिये का प्रयोग कर सकते हैं। बिस्तर पर गद्दा भी बहुत नरम न हो कड़क गद्दा रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने में सहायक होता है और इससे जुड़ी सभी परेशानियों में आराम दिलाता है।
  • सो कर उठते हुए या लेटक्रर उठते समय एक तरफ करवट लेकर पहले बिस्तर पर सीधा बैठ जायें फिर उठे, झटके से बिलकुल ना उठे।
  • कम से कम 20 -30 मिनट जितना आराम से चला जाये नियमित पैदल सैर करें।
  • दिन भर आप कोई काम करें पर ध्यान रहे की गर्दन को कोई झटका न आये और जब भी थकान महसूस हो काम बिच में छोड़ कर कुछ देर गर्दन को आराम ज़रूर दें।
  • दर्द होने पर गर्दन को एकदम सीधा रखें और जितना हो सके बेल्ट बांध कर ही रखें।
  • याद रखिये आप की सेहत का ख्याल आप ही को रखना है यदि आप स्वस्थ होंगे तो सभी काम वैसे भी हो ही जाएंगे।

क्या ना करें :

  • लंबे समय तक एक ही स्थिती में बिलकुल न बैठे, इससे गर्दन पर बहुत जोर पड़ता है।
  • यदि दर्द अधिक हो तो ऐसा कोई व्यायाम ना करें जिनसे गर्दन पर ज़ोर पड़े और आपकी पीड़ा ओर बड़ जाये।
  • सर और कँधे पर किसी प्रकार का वजन ना उठायें, इससे रीढ़ की हड्डी पर अनुचित खिचाव पड़ता है और हडियों के बीच की दूरियां ओर बढ़ सकती है।
  • कोशश करें गड्ढे वाले रास्तों से न गुज़रें, हांलांकि ये थोड़ा मुश्किल है क्योंकि रास्ते का आप कुछ तय नहीं कर सकते। ऐसे में आप गर्दन की बेल्ट और कार की सीट बेल्ट लगाकर ही यात्रा करें।
  • कुछ लोगों को पेट के बल सोने की आदत होती है पर यदि आपको सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस ने घेर लिया है तो पेट के बल बिलकुल ना सोयें। ऐसा करने से रीढ़ की हड्डी लटकी रहती है और आपको साडी रात सो कर भी, नींद पूरी होने पर भी आराम महसूस नहीं होता। इसलिए सीधा लेट कर ही सोएं ताकि रीढ़ की हड्डी को बिस्तर की सतह का पूरा सहारा मिल सके और आपको रात की नींद से सम्पूर्ण आराम मिल सके।
  • अगर आपको किसी चीज़ को देखने के लिए मुड़ना हो तो गर्दन को घुमाकर पीछे ना देखें, बल्कि पूरी तरह खुद ही घूम कर देखें।
  • जब भी दर्द हो तो आराम पाने के लिए रीढ़ की हड्डी की मालिश बिलकुल ना कराएँ। रीढ़ की हड्डी बहुत नाज़ुक होती है और कटोरियों की तरह होती है इसलिए मालिश करवाने से रीढ़ की हड्डियों के बीच और जगह बढ़ सकती है, कटोरियाँ अपनी जगह से हिल भी सकतीं है और आपको आराम की बजाये ओर पीड़ा भोगनी पड़ सकती है।

सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस के लिए व्यायाम और योगासन

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटस को योग अथवा व्यायाम द्वारा ठीक किया जा सकता है। पहले कुछ दिन योग अथवा व्यायाम के विशेषज्ञों से अच्छी तरह सीख कर फिर प्रतिदिन स्वयं करने से बहुत फायदा मिलता है। कुछ सामान्य व्यायाम निम्नलिखित हैं:

व्यायाम: सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटस में किये जाने वाले मुख्य व्यायाम गर्दन और सर की मांसपेशियों को आराम देने और सर्वाइकल वर्टिब्रा यानि गर्दन की हड्डियों का लचीलापन बढ़ाने में मदद करते हैं। प्राथमिक तौर पर निम्न 3 व्यायाम करने से बहुत लाभ मिलता है।

  • पहले दाहिने गाल पर दाईं हथेली रखें अब दाहिनी ओर गर्दन घुमाने का प्रयास करें। ऐसा करते हुए दाहिनी हथेली पर दबाव महसूस होगा और आप उस दबाव के विपरीत दिशा में देखेंगे। बिलकुल इसी तरह बायें गाल पर बायीं हाथेली रखिये और ऊपर लिखी प्रक्रिया अब बायीं ओर दोहराइये।
  • दूसरी प्रक्रिया में दोनों हथेलियों को माथे पर रखकर दबाव डालने की कोशिश करें और इसके विपरीत माथे से हथेलियों पर दबाव डालें।
  • इस बार दोनों हाथों की अंगुलियों को आपस में फंसाकर सर के पीछे के हिस्से पर रखें और इस हथेलीयों के जाल से सर पर आगे की ओर दबाव डालें, फिर इसी तरह सर से पीछे की ओर हथेलीयों के जाल पर दबाव डालें।

योगासन: इसके अतिरिक्त कुछ योगासन भी आपको सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटस की भीषण पीड़ा में आराम दिला सकते हैं। जैसे: भुजंगासन, नौकासन, धनुरासन आदि।

Disclaimer: ऊपर बताए गए व्यायाम अथवा योगासन अपने डॉक्टर की सलाह से ही करें और खास ख्याल रखें की इन व्यायामों को डॉक्टर के बताये व्यायामों के बदले बिलकुल ना करें। कृपया व्यायाम अथवा योग प्रशिक्षक के सानिध्य में ही करें। व्यायाम करते हुए यदि आपको दर्द या कोई और परेशानी महसूस हो तो तुरंत व्यायाम करना बंद कर दीजिये और जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर से संपर्क अवश्य कर लें।

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटस एक गंभीर समस्या है और इसका इलाज बहुत-बहुत आवश्यक है कृपया कर इसे नज़र अंदाज़ न करें और अपना बेहद ख्याल रखें, क्योंकि ये शरीर और इसकी स्वस्थता इंसान की सबसे बड़ी पूंजी है।

उपरोक्त लेख का उद्देश्य आपके कुशल एवं स्वस्थ जीवन की कामना ही है। 

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Ramandeep
An intense writer, a poetess with feel & purpose, a vigorous blogger to motivate homemakers and a spiritual mind maker. I believe in moving along with everyone. You can find more about me on pearlsofwords.com

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Responses

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