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Ramandeep
Last updated 17 Sep 2019 . 1 min read

अगर आप गर्दन के दर्द से परेशान है तो अभी इसे पढ़ें


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cervical spondylosis in hindi cervical spondylosis in hindi

कुछ वर्षों पहले तक जिन बिमारियों के बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था आज वे हमारी ज़िन्दगी का हिस्सा बनती जा रहीं हैं। ये शारीरिक समस्याएं जैसे जोड़ो में दर्द, पीठ में दर्द, गर्दन दर्द करना इत्यादि कभी-कभी इतने दर्दनाक होते हैं कि जिसे सहन करना लगभग नामुनकिन ही हो जाता है। शरीर पर लगी चोट अथवा बुखार आदि को देख कर या माप कर बीमारी की स्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता है पर दर्द की तीव्रता का अंदाज़ा केवल दर्द सहने वाला ही लगा सकता है।

इसी तरह की एक बहुत परेशान करने वाली बीमारी है गर्दन में दर्द का होना, यह एक हड्डियों से जुड़ी समस्या है। यह बीमारी कंधों, गर्दन आदि में गंभीर दर्द देती है व यह समस्या किसी को भी हो सकती है। वर्तमान समय में अनियमित दिनचर्या और अनिश्चित जीवनशैली के चलते अधिकतम लोग सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस के शिकार हैं। इसलिए हम सभी को इसकी वजह, लक्षण और घरेलू उपचारों की जानकारी होनी ही चाहिए।

क्या है सर्वाइकल स्पॉन्डिल्यासीस?

सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस गर्दन और रीढ़ की हड्डी की बीमारी है । यह बीमारी आम तौर पर गर्दन झुका कर काम करने वालों को होती है। कार्यालय में बैठकर गर्दन झुका कर कई घंटों लगातार काम करने वाले, लगातार एक स्थिति में पढ़ने वाले या टेबल-कुर्सी पर बैठ कर काम करने वाले अधिकतर लोग इसके शिकार हो जाते हैं। दूसरी ओर, आजकल स्मार्ट फोन पर देर तक गर्दन झुकाकर, सर और गर्दन को अनुचित स्थिति में रखने से भी इसकी समस्या बहुत बढ़ रही है।

वैज्ञानिक तथ्य एवं कारण

  • सर्वाइकल स्पॉन्डिल्यासीस बढ़ती उम्र के साथ रीढ़ की हड्डी के जोड़ो में उपस्थित कुशन में होने वाले अनुचित बदलावों के कारण होता है।
  • बाजुओं में कमजोरी महसूस होना और गर्दन में हर समय रहने वाली ऐठन सर्वाइकल स्पॉन्डिल्यासीस की ओर इशारा करती है।
  • ऐसा देखा गया है कि 40 की उम्र के बाद रीढ़ की हड्डी के बीच उपस्थित कुशन कमज़ोर हो जाती है और रीढ़ की हड्डी का लचीलापन भी कम हो जाता है, इससे नस पर दबाव आता है और असहनीय दर्द, संवेदनशून्यता, झनझनाहट, कमजोरी आदि महसूस होती हैं।
  • एक ही मुद्रा में लंबे समय तक गर्दन की हड्डी के इस्तेमाल से दो हड्डियों के बीच की खाली जगह कम हो जाती है और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी मांसपेशियों में बाधा आने से गर्दन व उसके आसपास दर्द होने लगता है, जो आगे चलकर सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस बन जाता है।

निम्नलिखित कारणों से भी सर्वाइकल स्पान्डिलाइटस होने की संभावना बढ़ सकती है:

  • व्यवसायिक कारण: सिर पर भारी वजन उठाना जैसे कुली, मजदूरी, नृत्य करना, बहुत वजनदार कसरत करना, सिलाई कढ़ाई करना, बारीकी से गहने बनाना आदि।
  • आनुवांशिक कारण: जब परिवारों में पीढ़ी दर पीढ़ी कोई रोग चला आता है तो ये आनुवांशिक कारण कहलाते हैं और आनुवांशिकता ईश्वर की देन है उससे भागा नहीं जा सकता। सर्वाइकल स्पान्डिलाइटस भी आनुवंशिकता से हो सकता है।
  • स्थिति और आदतें: लगातार सिर झुकाकर काम करना, लंबी दूरी की यात्रा करते हुए बैठे-बैठे सो जाना, टेलीफोन को कंधे के सहारे रखकर लंबे समय तक बात करना आदि से भी इसका खतरा बढ़ जाता है।

क्विक ट्रिक्स

  • जब लंबे समय तक एक ही अवस्था में बैठकर या झुककर काम करना हो तो समय-समय पर ब्रेक अवश्य लें ताकि मांसपेशियों को राहत मिल सके और जकड़न दूर हो सके।
  • यदि आपको आगे की ओर झुककर काम करना होता है तो काम के बाद कुछ देर पीछे की ओर झुककर व्यायाम अवश्य करें।
  • यदि आपको निरंतर गर्दन में दर्द होता है तो डॉक्टर की सलाह से गर्दन का एक्स-रे करवा लें।
  • यदि आपको सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस हो ही गया है तो सही उपचार लें और व्यायाम करें, अवश्य आराम मिलेगा।
  • जब हमारा शरीर किसी रोग से झूझने लग जाता है तो इसे जीवन का विराम न मानते हुए अपनी जीवन शैली में उचित परिवर्तन करने से ही हम अपना जीवन सुचारु रूप से जी सकते है।

क्या हैं सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस के प्रमुख लक्षण?

  • रह रहकर गर्दन और कधों में भीषण दर्द का होना और इस दर्द का लंबे समय तक रहना सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस का लक्षण है।
  • धीरे-धीरे गर्दन में दर्द के साथ-साथ मासपेशियों में अकड़न भी आने लगती है।
  • कई बार यह दर्द तेजी से कंधों से सर की ओर फैल जाता है।
  • कुछ मरीजों में यह दर्द पीठ में भी असर डालने लगता है और फिर कंधों से होकर हाथों और उंगलियो तक भी महसूस होने लगता है।
  • सर के पिछले हिस्से में बहुत दर्द होता है।
  • अचानक ही गर्दन और कंधे में सनसनी होना भी सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस का लक्षण है।
  • कभी कभार असामान्य लक्षण भी देखे जाते हैं जैसे कि छाती में दर्द होना।
  • गर्दन घुमाने में बहुत मुश्किल होना।
  • गर्दन की मासपेशियों में अकड़न रहना।
  • गंभीर स्थिति में गर्दन और हाथों की मांसपेशियों में असामान्य कमजोरी का पाया जाना।

सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस की जाँच

सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस एक गंभीर रोग है, इसलिए इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। इसके लक्षणों को भांपते ही तुरंत मेडिकल जाँच बहुत आवश्यक है। इस रोग की पुष्टि करने के लिए कुछ जाँचें की जा सकती है, जैसे कि:

  • गर्दन का एक्सरे: एक्सरे करवाने से रीढ़ की हड्डी में उभरे हुए नुक्स नजर आ जाते है।
  • MRI (Magnetic Resonance Imaging): इस जाँच से सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस का निदान निश्चित किया जा सकता है। इस जांच के माध्यम से यह भी पता लगाया जा सकता है कि नस पर दबाव असल में कहाँ पड़ रहा है और पड़ भी रहा है या नहीं ।
  • EMG (Electromyography): यह जांच ग्रसित स्थान पर नसों की जड़ों में हुए नुकसान को भांपने में बहुत मदद करती है।

क्या है सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस का सही उपचार?

#1. औपचारिक उपचार

डॉक्टर की सलाह से दर्द कम करने की एलोपैथिक दवाईयों के सेवन से शरीर को आराम मिल जाता है और सभी काम सुचारु रूप से कर पाते हैं। गर्दन के आस पास की मांसपेशियों में हो रही ऐंठन को कम करने के लिए भी ये दवाईयाँ बहुत सहायक रहतीं हैं। इसके अतिरिक्त मेडिकेटिड गर्दन की बेल्ट के प्रयोग से गर्दन की गतिविधियों को नियंत्रित किया जा सकता है और दर्द में आराम मिलता है। ऑपरेशन्स की मदद से भी नस पर पड़ते हुए दबाव को कम किया जाता है।

#2. फिजियोथेरेपी

इस प्रक्रिया से मरीज़ की बीमारी को लंबे समय तक बने रहने से रोकता है, साथ ही दवाइयों की मात्रा भी कम हो जाती है। यहाँ तक कि सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस की असहनीय पीड़ा को दोबारा होने से भी रोकता है।

#3. जीवनशैली में उचित बदलाव

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटस के लक्षणों की पुष्टि हो जाने के बाद मरीज़ को अपनी जीवनशैली में कुछ उचित बदलाव कर लेने चाहिए। जिन कामों को करने से दर्द महसूस होता हो या उस काम को करने के कुछ समय बाद दर्द होता हो उन सभी का परहेज़ करना अति आवश्यक हैं। कुछ ऐसे काम जिनको अपने जीवन का हिस्सा बना लिया जाये तो दर्द में आराम मिल सके और शायद धीरे-धीरे बीमारी बिल्कुल ही ठीक हो सके उन्हें अपने जीवन में बिना देर किये शामिल कर लेना चाहिए।

क्या करें:

  • गर्दन से सम्बंधित योग और व्यायाम को अपने जीवन का अटूट हिस्सा बना लीजिये। इनसे गर्दन की मांसपेशियों को मजबूती और लचीलापन मिलता है।
  • सोते समय तकिये का प्रयोग तो छोड़ ही देना चाहिए। अगर आदत बदलने में मुश्किल हो रही हो तो पतला तकिया लें या सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस के लिए विशेष मेडिकेटेड तकिये का प्रयोग कर सकते हैं। बिस्तर पर गद्दा भी बहुत नरम न हो अपितु कड़क गद्दा रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने में सहायक होता है और इससे जुड़ी सभी परेशानियों में आराम दिलाता है।
  • सो कर उठते हुए या लेटकर उठते समय एक तरफ करवट लेकर पहले बिस्तर पर सीधा बैठ जायें फिर उठे, झटके से बिल्कुल ना उठे।
  • कम से कम 20 -30 मिनट जितना आराम से चला जाये उतना नियमित पैदल सैर करें।
  • दिन भर आप कोई भी काम करें पर ध्यान रहे कि गर्दन को कोई झटका न आये और जब भी थकान महसूस हो काम बीच में छोड़ कर कुछ देर गर्दन को आराम अवश्य दें।
  • दर्द होने पर गर्दन को एकदम सीधा रखें और जितना हो सके बेल्ट बांध कर ही रखें।
  • याद रखिये आप की सेहत का ख्याल आप ही को रखना है यदि आप स्वस्थ होंगे तो सभी काम वैसे भी हो ही जाएंगे।

क्या ना करें:

  • लंबे समय तक एक ही स्थिती में बिल्कुल न बैठे, इससे गर्दन पर बहुत जोर पड़ता है।
  • यदि दर्द अधिक हो तो ऐसा कोई व्यायाम ना करें जिनसे गर्दन पर ज़ोर पड़े और आपकी पीड़ा और बढ़ जाये।
  • सर और कँधे पर किसी प्रकार का वजन ना उठायें, इससे रीढ़ की हड्डी पर अनुचित खिचाव पड़ता है और हड्डियों के बीच की दूरियां और बढ़ सकती है।
  • कोशश करें गड्ढे वाले रास्तों से न गुज़रें, हांलांकि ये थोड़ा मुश्किल है क्योंकि रास्ते का आप कुछ तय नहीं कर सकते। ऐसे में आप गर्दन की बेल्ट और कार की सीट बेल्ट लगाकर ही यात्रा करें।
  • कुछ लोगों को पेट के बल सोने की आदत होती है पर यदि आपको सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस ने घेर लिया है तो पेट के बल बिलकुल ना सोयें। ऐसा करने से रीढ़ की हड्डी लटकी रहती है। इसलिए सीधा लेट कर ही सोएं ताकि रीढ़ की हड्डी को बिस्तर की सतह का पूरा सहारा मिल सके और आपको रात की नींद से सम्पूर्ण आराम मिल सके।
  • अगर आपको किसी चीज़ को देखने के लिए मुड़ना हो तो गर्दन को घुमाकर पीछे ना देखें, बल्कि पूरी तरह खुद ही घूम कर देखें।
  • जब भी दर्द हो तो आराम पाने के लिए रीढ़ की हड्डी की मालिश बिल्कुल ना कराएँ। रीढ़ की हड्डी बहुत नाज़ुक होती है और कटोरियों की तरह होती है। इसलिए मालिश करवाने से रीढ़ की हड्डियों के बीच और जगह बढ़ सकती है व कटोरियाँ अपनी जगह से हिल भी सकतीं है और आपको आराम की बजाये ओर पीड़ा भोगनी पड़ सकती है।

सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस के लिए व्यायाम और योगासन

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटस को योग अथवा व्यायाम द्वारा ठीक किया जा सकता है। पहले कुछ दिन योग अथवा व्यायाम के विशेषज्ञों से अच्छी तरह सीख कर फिर प्रतिदिन स्वयं करने से बहुत लाभ मिलता है। कुछ सामान्य व्यायाम निम्नलिखित हैं:

व्यायाम: सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटस में किये जाने वाले मुख्य व्यायाम गर्दन और सर की मांसपेशियों को आराम देने और सर्वाइकल वर्टिब्रा यानि गर्दन की हड्डियों का लचीलापन बढ़ाने में मदद करते हैं। प्राथमिक तौर पर निम्न 3 व्यायाम करने से बहुत लाभ मिलता है।

  • पहले दाहिने गाल पर दाईं हथेली रखें, अब दाहिनी ओर गर्दन घुमाने का प्रयास करें। ऐसा करते हुए दाहिनी हथेली पर दबाव महसूस होगा और आप उस दबाव के विपरीत दिशा में देखेंगे। बिल्कुल इसी तरह बायें गाल पर बायीं हाथेली रखिये और ऊपर लिखी प्रक्रिया अब बायीं ओर दोहराइये।
  • दूसरी प्रक्रिया में दोनों हथेलियों को माथे पर रखकर दबाव डालने की कोशिश करें और इसके विपरीत माथे से हथेलियों पर दबाव डालें।
  • इस बार दोनों हाथों की अंगुलियों को आपस में फंसाकर सर के पीछे के हिस्से पर रखें और इस हथेलीयों के जाल से सर पर आगे की ओर दबाव डालें, फिर इसी तरह सर से पीछे की ओर हथेलीयों के जाल पर दबाव डालें।

योगासन: इसके अतिरिक्त कुछ योगासन भी आपको सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटस की पीड़ा में आराम दिला सकते हैं जैसे कि भुजंगासन, नौकासन, धनुरासन आदि।

नोट: ऊपर बताए गए व्यायाम अथवा योगासन अपने डॉक्टर की सलाह से ही करें और ध्यान रखें कि इन व्यायामों को डॉक्टर के बताये व्यायामों के बदले बिल्कुल ना करें। कृपया व्यायाम अथवा योग प्रशिक्षक के सानिध्य में ही करें। व्यायाम करते हुए यदि आपको दर्द या कोई और परेशानी महसूस हो तो तुरंत व्यायाम करना बंद कर दीजिये और जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर से संपर्क अवश्य कर लें।

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटस एक गंभीर समस्या है और इसका इलाज बहुत आवश्यक है। कृपया इसे नज़रअंदाज़ न करें और अपना ध्यान रखें,क्योंकि यह शरीर और इसकी स्वस्थता इंसान की सबसे बड़ी पूंजी है।

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Ramandeep
An intense writer, a poetess with feel & purpose, a vigorous blogger to motivate homemakers and a spiritual mind maker. I believe in moving along with everyone. You can find more about me on pearlsofwords.com

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Responses

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    Agar chakkar bhi aaye to kya karna chahiye
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