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28 Mar 2018 . 1 min read

5 कानून जिनके बारे में हर कामकाजी महिला को पता होना चाहिए


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कार्य करने वाले लोगों के हितों और भारतीय कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करने के लिये पिछले कुछ सालों में कई अधिनियम पारित किये गये हैं। इनसे से कई अधिनियम महिला कर्मचारियों को विशेष प्रावधान प्रदान करते हैं। आज के दौर में महिलाओं के लिये कार्य करने के अनेक अवसर उपलब्ध होने और आईटी व स्टार्ट अप जैसे विशिष्ट उद्योगों के तेजी से विकसित होने के कारण सार्वजनिक और निजी दोनों ही क्षेत्रों में प्रोफेशनल महिला कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

कामकाजी महिला (वर्किंग वूमन) के संरक्षण के लिए भारतीय श्रम कानून

भारत में सभी कर्मचारियों (चाहे पुरुष हो या महिला) को लाभ और सुरक्षा प्रदान करने के लिये विभिन्न श्रम कानून बनाये गये हैं। इस लेख में हम इन कानूनों के बारे में जानकारी देंगे।

जैसा कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने एक भाषण में कहा था, महिलाएं हमारी आबादी का 50% हिस्सा है और यदि वह बाहर आकर काम नहीं करेंगी तो हमारा देश उस गति से कभी विकास नहीं कर सकता जिसकी हम कल्पना करते हैं, और यही कारण है कि भारत की विकास कहानी में महिलाओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकारों ने समय के साथ कानून बनाने और उनमें संशोधन करने की ओर  विशेष ध्यान दिया है।

# 1. मातृत्व लाभ संशोधन अधिनियम, 2017

इससे पहले 1961 में मातृत्व लाभ अधिनियम पारित किया गया था। पिछले साल ही इस एक्ट की जगह नया संशोधित अधिनियम लागू किया गया। इस संशोधित अधिनियम के अर्न्तगत छुटट्यिों की संख्या बढ़ाये जाने के साथ ही कई नये प्रावधानों को प्रस्तुत करने के लिये प्रेरित किया। मातृत्व लाभ अधिनियम में बदलाव के बाद महत्वपूर्ण व्यवस्था के कुछ भाग यह हैं:

  • अधिनियम में किये गये सुधार के बाद मातृत्व अवकाश की वर्तमान 12 सप्ताह की अवधि को 26 सप्ताह कर दिया गया है। प्रसवपूर्व अवकाश की अवधि भी 6 सप्ताह से बढ़ाकर 2 महीने कर दी गयी है। हालांकि, कम से कम दो बच्चों वाली एक महिला को प्रभावी रूप से 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिल सकता है। इस स्थिति में डेढ़ महीने का जन्म से पूर्व अवकाश दिया जाता है। ​
     
  • इसी तरह से अधिनियम में किया गया सुधार पुरानी सहायक माताओं को भी लाभ पहुंचाता है। तीन माह से कम आयु के बच्चे को अपनाने (एडॉप्ट करने) वाली महिला को 12 सप्ताह का अवकाश दिया जाता है। इसी तरह से एक अधिकृत मां को बच्चे को उसको सौंपे जाने की तारीख से 12 सप्ताह का अवकाश प्राप्त करने का अधिकार है। एक अधिकृत मां को ‘जैविक मां जो किसी अन्य महिला में भ्रूण समाहित (एम्बेडेड)  करने के लिये अपने अंडे का प्रयोग करती है’ के रूप में वर्णित किया गया है। (जो महिला बच्चे को जन्म देती है उसे होस्ट या सरोगेट मां कहा जाता है)।​
     
  • अधिनियम के अर्न्तगत किसी भी व्यवसाय के लिये महिला कर्मचारी की नियुक्ति के समय उसे इस अधिनियम के तहत उसके अधिकारों के बारे में बताना आवश्यक है। इस संबंध में डेटा/जानकारी को महिला कर्मचारी को लिखित या इलेक्ट्रानिक रूप (ई-मेल) में दिया जाना चाहिये। ​
     
  • महिला सरकारी कर्मचारी को अपने पहले दो जीवित बच्चों के लिए 180 दिनों का मातृत्व अवकाश दिया जाता है। ​
     
  • नए अधिनियम ने नयी माताओं को टेलीकम्यूटिंग / घर से काम करने का विकल्प भी प्रदान किया है। 26 सप्ताह की अवकाश अवधि पूरी हो जाने के बाद महिलाएं इस व्यवस्था का अभ्यास कर सकती हैं। कार्य करने के प्रासंगिक विचार पर सामान्यत: व्यापार से जुड़ी हुई शर्तों के आधार पर महिलाओं के प्रतिनिधियों में इस अवसर का लाभ उठाने की क्षमता हो सकती है। ​
     
  • अधिनियम में परिवर्तन के तहत कम से कम 50 कर्मचारियों से कार्य कराने वाले प्रत्येक संस्थान के लिये शिशु गृह (क्रेच)  की सुविधा प्रदान करना अनिवार्य है। महिला श्रमिकों को दिन में 4 बार शिशु गृह में जाने की अनुमति दी जायेगी।

अपने अस्तित्व के बावजूद पुराना मातृत्व अधिनियम नयी माताओं को पर्याप्त संख्या में अवकाश देने में सक्षम नहीं था। अवकाश पाने के लिये महिलाओं को लड़ाई लड़ने के साथ ही नौकरी तक छोड़नी पड़ती थी। जब महिलाएं बहुत जल्दी कार्य करना शुरू कर देती हैं तो अन्य मुद्दों की तरह निष्पादन के मुद्दे का भी सामना करना पड़ता था। इस प्रकार, यह समय के बारे में है, महिलाओं को उनके लिये आवश्यक लाभ प्रदान किये गये थे। नया अधिनियम सिर्फ काम करने वाली महिलाओं को सकारात्मक रूप से प्रेरित ही नहीं करता बल्कि यह लाभ दिलाने और उत्साहित करने वाली कार्य संस्कृति को भी प्रेरित करता है।

#2. कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013  (‘ एसएचए’)

काम  के दौरान यौन उत्पीड़न असामान्य बात नहीं है और हमारे सामने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के विभिन्न मामले आते हैं। सन 2013 में भारत ने आखिरकार कार्यस्थल पर महिला कर्मचारियों के खिलाफ होने वाले यौन उत्पीड़न की रोकथाम करने के लिये अपना कानून अधिनियमित किया। यह कानून विशाखा और अन्य बनाम राजस्थान सरकार (विशाखा निर्णय) के मामले में भारतीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये ऐतिहासिक फैसले के लगभग 16 साल बाद अधिनियमित किया गया। विशाका निर्णय ने कार्य करने के दौरान किये गये यौन उत्पीड़न के संबंध में शिकायतों का निवारण करने और काम करने वाली महिलाओं (दिशा-निर्देश) के लैंगिक समानता के अधिकार को लागू करने के लिए एक तंत्र प्रदान करने के लिये दिशा-निर्देश निर्धारित किये थे जिनका पालन करना प्रत्येक नियोक्ता के लिए अनिवार्य है। यौन उत्पीड़न अधिनियम के अधिनियमन होने तक,संगठनों से दिशा-निर्देशों  का पालन करने की उम्मीद थी, लेकिन ज्यादातर मामलों में, वह ऐसा करने में नाकाम रहे। यौन उत्पीड़न अधिनियम के अधिनियमन ने महिला कर्मचारियों को बहुत बड़ी राहत प्रदान की है।

यौन उत्पीड़न अधिनियम में यौन उत्पीड़न की परिभाषा विशाखा फैसले में सर्वोच्च न्यायालय की परिभाषा के अनुरूप है और इसमे प्रत्येक अवांछित यौन निर्धारित व्यवहार (चाहे प्रत्यक्ष या निहितार्थ द्वारा) शामिल है, जैसे की :

  • शारीरिक संपर्क और दोस्ती, प्यार जताने का प्रयास,
  • यौन अनुग्रह/सुख के लिए मांग या अनुरोध,
  • लैंगिक रूप से रंगीन मिजाजी वाली टिप्पणी,
  • अश्लील साहित्य दिखाना,
  • अथवा यौन स्वभाव का कोई भी अन्य अप्रिय शारीरिक, मौखिक या गैर-मौखिक आचरण

यौन उत्पीड़न की शिकायतों से निपटने के अलावा, एक नियोक्ता के अतिरिक्त दायित्व इस रूप में हैं :

  • एक सुरक्षित कामकाजी वातावरण प्रदान करना,
  • आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) की संरचना और यौन उत्पीड़न कृत्यों में शामिल होने के परिणामस्वरूप दिये जाने वाले दंड को कार्यस्थल पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शन करना
  • कार्यस्थलों में यौन उत्पीड़न के मुद्दों और निहितार्थ पर कर्मचारियों को संवेदनशील बनाने के लिए नियमित अंतराल पर कार्यशालाओं और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन और आईसीसी के सदस्यों के लिए अभिविन्यास कार्यक्रमों का आयोजन
  • यौन उत्पीड़न को सेवा नियमों के तहत दुर्व्यवहार मानना और ऐसा करने पर कार्रवाई करना

#3. कारखाना अधिनियम, 1948 (‘कारखाना अधिनियम’)

कारखाना अधिनियम (फैक्ट्री अधिनियम) एक कारखानें में कार्यरत श्रमिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा, हितों, उचित कार्य घंटे, छुट्टी और अन्य लाभों को सुरक्षित करने के लिये बनाया गया एक कानून है। कारखाना अधिनियम का उद्देश्य कारखानों में कार्यरत श्रमिकों को उनके नियोक्ता द्वारा किये जाने वाले अनुचित शोषण से बचाना है। कारखाना अधिनियम में महिला श्रमिकों के लिये विशिष्ट प्रावधान भी हैं।  

कारखाना अधिनियम के अर्न्तगत सभी व्यस्क श्रमिकों के लिये काम करने के घंटे निर्धारित किये गये हैं। इस अधिनियम के अर्न्तगत  निर्धारित घंटों से अधिक काम करने वाले श्रमिकों को अतिरिक्त कार्य का भुगतान (ओवरटाइम पे) प्रदान किया जाना चाहिये।

इसमे अंतराल या कार्य दिवस के बीच आराम करने का समय, साप्ताहिक अवकाश, वार्षिक छुट्टियां आदि से संबंधित प्रावधान भी शामिल किये गये है।

आमतौर पर कारखानों में यह देखा गया है कि काम पाली (शिफ्टों) के अनुसार होता है और नाइट शिफ्ट में कार्य करने के लिये श्रमिकों की आवश्यकता होती है। हालांकि रात्रि पाली (नाइट शिफ्ट) में बदलाव चक्रीय आधार पर होना आवश्यक है। इसके अलावा, शिफ्ट का समय और काम के घंटे प्रबंधन द्वारा पहले से तय करना और कारखाने के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करना आवश्यक है।  

किसी भी महिला श्रमिक को सुबह 6 बजे से लेकर शाम 7 बजे के बीच के समय को छोड़कर बाकी समय में कार्य करने की अनुमति नहीं दी जायेगी। राज्य सरकार अधिसूचना जारी कर इस बिंदु पर निर्धारित सीमाओं को बदल सकती है, लेकिन किसी भी परिस्थिति में महिला कर्मचारी को रात 10 बजे से सुबह 5 बजे के बीच कार्य करने की अनुमति नहीं दी जायेगी।

साप्ताहिक अवकाश या किसी अन्य अवकाश के अलावा किसी महिला श्रमिक की शिफ्ट का समय नहीं बदला जा सकता। इसलिये, किसी भी महिला कर्मचारी की शिफ्ट में बदलाव किये जाने से पहले उसे कम से कम 24 घंटे का नोटिस दिया जाना चाहिये।

महिला श्रमिकों के लिये खतरनाक व्यवसाय, रूई दबाने में जहां एक रूई अलग करने वाला काम करता है में काम करना मना है और अधिकतम भार उठाने की सीमा है।

कारखाना अधिनियम में 30 या उससे अधिक महिला श्रमिकों से कार्य कराने वाले नियोक्ता द्वारा महिला श्रमिकों के 6 वर्षीय या उससे कम आयु के बच्चों के लिये शिशु गृह प्रदान करना आवश्यक है।

कारखाने में कार्यरत श्रमिकों को कई अन्य सुविधाएं जैसे महिला श्रमिकों को नहाने और धोने की सुविधा, शौचालय (महिलाओं के लिये अलग शौचघर और मूत्रालय), विश्रामगृह और जलपान गृह दिये जाना आवश्यक है।

समय-समय पर राज्य सरकारें कारखाना अधिनियम के प्रावधानों में संशोधन के लिये अधिसूचना जारी करती है जो उस राज्य विशेष में स्थित कारखानों में कार्यरत श्रमिकों के लिये लागू होती है। उदाहरण के तौर पर 1 दिसंबर को राष्टÑपति प्रणब मुखर्जी ने महाराष्टÑ कारखाना (संशोधन) विधेयक 2015 के लिये अपनी सहमति प्रदान की थी, जिसमें अन्य संशोधनों के साथ ही, महिलाओं को कारखाने में रात की पाली में काम करने की अनुमति प्रदान की गयी है। कारखाना अधिनियम में संशोधन से पहले महिला श्रमिकों को शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे के बीच कारखाने में काम करने की अनुमति नहीं थी। इस संशोधन के साथ ही कारखाना प्रबंधन के लिये रात की पाली में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य है।

#4. समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 (‘समान पारिश्रमिक अधिनियम’)

हम फिर से भुगतान में भेदभाव के मामले, जहां महिला श्रमिकों को उनके पुरुष समकक्षों की तुलना में कम भुगतान किया जाता है पर चर्चा करते हैं। पूरी दुनिया में, यहां तक की विकसित देशों में भी महिला श्रमिकों के साथ भुगतान में भेदभाव किया जाता है। हमारे संविधान के अनुच्छेद 39 में निर्देशित है कि राज्य पुरुषों और महिलाओं के लिये समान कार्य का समान भुगतान की नीतियां विशेष रूप से लागू करेगा।

समान पारिश्रमिक अधिनियम के तहत:

  • नियोक्ता अपने वही या एक समान कार्य करने रहे अपने पुरुष और महिला कर्मचारियों को समान पारिश्रमिक का भुगतान करेगा।
  • भर्ती के दौरान नियोक्ता पुरुष और महिला के बीच भेदभाव नहीं कर सकता, जब तक कि वहां कुछ उद्योगों में महिलाओं को रोजगार के लिए कानून के तहत कोई प्रतिबंध लागू न हो।

#5. दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम (‘एसईए’)

राज्य सरकारें अपने-अपने दुकान और प्रतिष्ठान अधिनियम का कानून बनाती है जो किसी दुकान या व्यावसायिक प्रतिष्ठान में कर्मचारियों की काम करने की स्थिति को नियंत्रित करता है। विभिन्न प्रावधानों (ए) सेवा समाप्ति के लिए नोटिस की अवधि, (बी) छुट्टी का अधिकार, और (सी) कार्य करने की स्थिति जैसे साप्ताहिक कार्य घंटे, साप्ताहिक अवकाश, अतिरिक्ति समय तक कार्य (ओवरटाइम) आदि से संबंधित प्रावधानों के लिये एसईए प्रदान किया जाता है।

महाराष्ट्र का दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम, 1948 (‘एमएसईए ’) महाराष्ट्र राज्य में प्रतिष्ठान होने पर लागू होता है और दिल्ली का दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम 1954 दिल्ली राज्य में स्थित प्रतिष्ठानों के मामलों में लागू होने वाला कानून है।

हालांकि काम करने की प्रवृति के आधार पर कुछ उद्योगों को निर्धारित सीमा से अतिरिक्त काम करने के लिए अपने महिला कर्मचारियों की आवश्यकता हो सकती है, जिसके लिए उन्हें अधिकारियों से पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता होगी। महिलाओं को देर रात तक काम करने की अनुमति को स्वीकृति दिये जाने पर नियोक्ता द्वारा कुछ विशेष शर्तें और दायित्व निभाना आवश्यक है जैसे कि महिला कर्मचारियों एक सुरक्षित कामकाजी वातावरण प्रदान करना, रात के घंटों के दौरान पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करना, देर रात तक कार्य के बाद महिला कर्मियों को उनके निवास तक पहुंचाने के लिये परिवहन की सुविधा प्रदान करना, रात में कार्य करने के दौरान महिलाओं अकेले रखने की बजाये समूह में रखना, आदि।   

आईटी सेक्टर ने हाल ही में एक तेजी से वृद्धि देखी है और यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसके पास विशिष्ट रूप से एक विशाल जनशक्ति है। आईटी सेक्टर में हम समान संख्या में महिला और पुरुषों को काम करते हुए देखते हैं, और वे दुनिया भर के देशों के खानपान और विविध समय अंतर के कारण शिफ्टों में देर रात तक कार्य करते हैं। इस क्षेत्र में कार्यरत महिला श्रमिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, एसईए के तहत प्रावधानों के अलावा, राज्य सरकारों की अपनी स्वतंत्र आईटी / आईटीईएस नीतियां हैं, जो महिलाओं की कामकाजी रात्रि पाली के मामले और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियोक्ता द्वारा किए जाने वाले विभिन्न उपायों का ध्यान रखती हैं।

अन्य अधिनियम

ऊपर बताए गए कानूनों के अलावा, कर्मचारियों के कल्याण और सुरक्षा के लिए अन्य कानून भी हैं। इसके अतिरिक्त, महिला कर्मचारियों को विभिन्न अधिनियमों से अवगत होना चाहिए जो कर्मचारी को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करते हैं, जैसे की, कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952, कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948, ग्रेच्युटी अधिनियम, 1972, का भुगतान, बोनस अधिनियम, 1965 का भुगतान, आदि।

द्वारा देबलीना सेन

संस्थापक, एडवेंट ज्यूरिस


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Responses

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    Teachers Ka sabse adhikar sosan hota h check Mai jyada salary dikha jr signature kawakr cash Karwa liye jate h or bahut Kam salary cash de do jati h.appointment letter hone k wawjood Bina kisi notice ya galti k Nikal diya jata h agar unki personal dimand na Mano .
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    For the private sector basically teachers getting harrassed by the organisation no other solutions are their for them full day standing and having 8hrs classes for such only 10 to 15 thousand. Horrible
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    Law is for our help....Not for results..What we supposed to want....
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    Muje kuch ni pta kya kru kese kru na koi help kr rha ha meru
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    Or treatment chalrha pgi Chandigarh Syctry word
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    Bahut achhi jaankari h Jada s Jada women ko iss bare m pta Hona chahiye
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    भूलने के बजाय उस पर फोकस कीजिये एक न एक दिन आपकी मेहनत रंग लायेगी
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    मैं भी जॉब करना चाहती हूं मुझे कहीं जॉब नहीं मिला सब कुछ भूलतीजा रही हूं ब्यूटीशियन का काम। मैं लाइफ में कुछ करना चाहती हूं।
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    Muje bhi bahut jarurat h job ki mere husband ki help karna chahti hu
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    Muje bhi bahut jarurat h job ki
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    Kuch domestic violence ke kanoon batayea
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    Bahot acchi jankari
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    Sarkar ne ye adhiniym jari karke ke mahila ko rojgar diya he or mahila apni ikccha se kam kr sakti he
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    Womens k lye y right h agr vo pregnant h to n delivery k bad ya phle leave leni ho to use koi mna ni kr skta...n na hi job s nikal skta...chahe vo private ho government... government m to h hi y rule follow...
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    Apne jo rules betaye hai Wo private sector Mai kaam kerne wali mahilao ke hai. Jo mahilaye government sector Mai contract basis per kaam kerti hai. Unke liye government NE kya rules or regulations benaye hai Kripya kerke unse bhi hme parichit kervaya. Kya modi ji ki serkar uske bare Mai Bhi koyi initiate le rhi hai. Aaj ke time me ye sbse Jyada jeruri hai.
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    Aap women's cell m jaa Kar complaint Kar sakti h Aayat Mansuri
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    Mem Mere Husband bar bar Unki mom ke kehne par Mujhe chod kar unke pass chale jate hai Police me report di hai but koi Sense nahi dikha ab kya kare
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    Agar rat me koi ladki ghar ya office Jane me dar lagta h to 1090 par camplen kar ke ghar se bahar nikale aur kabhi Apne apko akela mahasus n kare aur jamesa usko nidar rhna chahiye ki samne wala kuch bol hi n paye
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    Agar koi mahila 1090 par apni complen karti Hai to Kya us mahila ko ye janne ka adhikar Hai ya nahi ki message or call ke dwara paresan karne bala kaun Hai
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    बिलकुल सही बात है
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    bhut ache se smjhaa dya. very useful all women 👍👍👍👍👍
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    धन्यवाद, क्या अभी भी महिलाओं से रात की शिफ्ट में काम करवाया जा सकता है?
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    Rule is rule 👍👍
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    Ha gi good hona chahiya
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    Good mahilao ko unki suraksha ka adikar jaruri h
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