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12 Mar 2018 . 1 min read

पुत्रवधू और उनके अधिकार !


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हाल ही में कुछ समय पहले, एक पति को उसकी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी ठहराते हुए भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि, ‘एक पुत्रवधू के साथ परिवार के सदस्य की तरह व्यवहार किया जाना चाहिये न कि नौकरानी की तरह’ और उसको किसी भी हालात में ‘उसके वैवाहिक घर से बाहर नहीं निकाला जा सकता है।’

कभी-कभी पति, ससुराल पक्ष और रिश्तेदारों द्वारा बहू के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जाता है वह समाज में भावनात्मक स्तब्धता की भावना पैदा करता है।

एक ऐसे देश में जहां एक महिला, खास तौर पर, विवाहित महिला के पास कोई भावनात्मक सुरक्षा नहीं होती और उसके सामने हमेशा अपने विवाह उपरांत घर को कभी भी छोडेÞ जाने के लिये मजबूर होने का खतरा मंडराता रहता है, जहां समाज की यह छोटी मानसिकता कि एक पत्नी को हमेशा पति से छोटा होना चाहिये के चलते ही विवाह के लिये लड़के का कानूनन 21 वर्ष का होना चाहिये वहीं लड़की के लिये यह उम्र 18 वर्ष रखी है, जहां संपति विरासत के अधिकार में भी भेदभाव रखा गया है और यह महिला और पुरुषों के लिये अलग-अलग होती है, ऐसे देश में केवल सामाज और लोगों द्वारा दिये जाने वाले अधिकारों से महिला हितों की रक्षा करना संभव नहीं है बल्कि उनके पास अधिक शक्तिशाली प्राधिकार द्वारा सुरक्षात्मक ढाल होनी चाहिये ताकि विपरित परिस्थितियों में वह खुद को असहाय महसूस न करें। हमें देश की न्यायिक प्रणाली को धन्यवाद देना चाहिये जिसमे पुत्रवधू के हितों की रक्षा के लिये अनेक कानून मौजूद हैं। यह कानून किसी बहू पर होने वाले अत्याचारों को तो नहीं रोक सकते  लेकिन पीड़िताओं को उत्पीड़न का डटकर मुकाबला करने में सक्षम अवश्य बनाते हैं। संभवत: हमारे संविधान निर्माता सामाजिक असमानताओं के कारण सदियों से हो रहे महिला उत्पीड़न की व्यथा को समझते थे और इसके चलते ही पुत्रवधू हितों के लिये कानून स्वीकृत किये गये। यही कारण है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15 (3) एक वधू के पक्ष में सकारात्मक कार्रवाई करने के लिए राज्य को सक्षम बनाता है। वास्तव में, भारत का संविधान उन बहुत कम दस्तावेजों में से एक है जहां लिंग समानता इतनी अच्छी तरह से ध्यान रखा गया है।

यह कुछ महत्वपूर्ण पुत्रवधू अधिकार हैं जिन्हें प्रत्येक विवाहित महिला को जानना चाहिए:

#1. स्त्रीधन

हिंदू कानून के अनुसार, विवाह से पहले होने वाले/विवाह समारोह (जैसे गोद भराई, बरात, मुंह दिखाई) और बच्चे के जन्म के दौरान जो भी एक महिला प्राप्त करती है (जिसमें सभी चल, अचल संपत्ति, उपहार आदि शामिल हैं) स्त्रीधन कहलाता है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया है कि स्त्रीधन पर एक महिला का पूर्ण अधिकार होता है और स्त्रीधन किसी भी दशा में किसी और को नहीं दिया जा सकता। अपने पति से अलग होने के बाद भी महिला स्त्रीधन पर अपना अधिकार जता सकती है। यदि मांगे जाने पर भी महिला को स्त्रीधन नहीं दिया जाये तो यह कानूनन अपराध है और घरेलू हिंसा के दायरे में आता है। ऐसा होने पर महिला अपने पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा सकती है। यदि कोई सास अपनी पुत्रवधु का स्त्रीधन अपने पास रख लेती है और वह बिना कोई वसीयत किये मर जाती है। ऐसी स्थिति में भी उसके पुत्र यानी महिला के पति या परिवार के किसी अन्य सदस्य के बजाये स्त्रीधन पर काननून उसकी पुत्रवधू का ही अधिकार होता है। ऐसे हालातों का मुकाबला करने के लिये एक महिला को निम्नलिखित सावधानियां जरूर बरतनी चाहियें:

  • महिला को मिले सभी उपहारों का सबूत अपने पास रखना चाहिये जैसे कि शादी की तस्वीरें आदि।
  • विवाह के समय प्राप्त चल-अचल संपति के उपहारों (गहने समेत) के सम्बन्ध में गवाहों/गवाहों के बयान भी अपने पास रखने चाहियें।
  • यदि स्त्रीधन का प्रयोग कर कोई निवेश किया गया है तो उसका रिकार्ड अपने पास रखना चाहिये और यह सुनिश्चित करना चाहिये की निवेश द्वारा प्राप्त की गयी संपति महिला के नाम पर हो।

#2. घरेलू हिंसा

प्रत्येक महिला के पास पति या उसके परिवार के किसी भी सदस्य द्वारा की गयी घरेलू हिंसा के आधार पर तलाक लेने के अलावा  उसके पास कार्यकारी अधिकारी, मजिस्ट्रेट के माध्यम से ‘शांति बनाए रखने का बंधन’ या ‘अच्छे व्यवहार का बंधन’ का विकल्प भी मौजूद होता है। इस तरह के मामलों में पति को प्रतिभूतिया/सिक्योरिटी (धन या संपति) जमा कराने के लिये भी कहा जा सकता है जिन्हें पति द्वारा फिर से पत्नी के साथ  हिंसापूर्ण व्यवहार किये जारी रखे जाने पर जब्त भी किया जा सकता है। शारीरिक, यौन, मानसिक, मौखिक और भावनात्मक हिंसा के निम्नलिखित कृत्य घरेलू हिंसा के दायरे में आते हैं:

  • भोजन देने से लगातार इनकार करना
  • विकृत यौन आचरण करने को मजबूर करना
  • एक महिला को घर पर ताला लगाकर लगातार बाहर रखना
  • महिला को बच्चों से न मिलने देना, जिससे मानसिक यातना हो सकती है
  • शारीरिक हिंसा
  • महिला को मानसिक यातना देने के इरादे से ताना मारना, हतोत्साहित करना और नीचा दिखाना
  • महिला को घर की चारदीवारी में ही सीमित रखना और उसको सामाजिक मेल-मिलाप करने की अनुमति न देना
  • मानसिक यातना देने के इरादे से मां की उपस्थिति में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार करना
  • मां को मानसिक पीड़ा पहुंचाने के उद्देश्य से बच्चों का पिता होने से इनकार करना  
  • दहेज न दिये जाने पर तलाक की धमकी देना  

#3. वैवाहिक घर (विवाह के बाद घर)

हिंदू दत्तक ग्रहण और सरंक्षण अधिनियम, 1956  के अनुसार, एक हिंदू पत्नी को अपने वैवाहिक घर में रहने का अधिकार है, भले ही वह उसका खुद का न हो। वैवाहिक घर से हमारा मतलब वह संपति है जिसका मालिक उसका पति होता है या फिर जिसमें वह रहता है। साथ या अलग रहने के बावजूद भी पति पर अपनी पत्नी और बच्चों को घर में आश्रय देने का दायित्व होता है, चाहे वह किराये का हो या उसका अपना। ऐसे मामले भी सामने आये हैं जब पति और पत्नी के बीच रिश्ते खराब हो जाने के बाद पति किराये पर लिया हुआ या कंपनी द्वारा दिया गया मकान छोड़ कर चला जाता है। लेकिन ऐसा कदम उठाने के बाद भी पति अपनी पत्नी और बच्चों को बुनियादी रखरखाव प्रदान करने की बाध्यता से मुक्त नहीं होता।  रखरखाव में भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा और चिकित्सा सेवा/उपचार और किसी अविवाहित बेटी के मामले में उसके विवाह के आयोजन में होने वाला उचित खर्च दिये जाने का प्रावधान शामिल हैं।

#4. पैतृक घर (अभिभावक का घर)

सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया है कि कानूनी तौर पर एक पिता को अपनी मृत्यु के बाद परिवार के अन्य सदस्यों को वंचित करने की प्रक्रिया में अपनी शादीशुदा बेटी को सहकारी सोसायटी फ्लैट के मालिक होने के लिए नामांकित करने का हक है। कोर्ट ने कहा है कि, ह्लइसमें कोई संदेह नहीं है कि नियमों के प्रावधानों के अनुरूप जिसमें एक सहकारी समिति का सदस्य किसी व्यक्ति को नामांकित करता है, उस सदस्य की मृत्यु के बाद उसके सभी शेयर या हितों को सहकारी समिति द्वारा नामांकित व्यक्ति को स्थानांतरित करना अनिवार्य है। विरासत या उत्तराधिकार के कारण दूसरों का अधिकार एक दासवत् (बिना महत्व का या अधीनस्थ) अधिकार है।ह्ल

इसके अलावा, यदि पिता द्वारा कोई वसीयत नहीं छोड़ी गयी है तो पिता की संपति में बेटी का पुत्रों के समान अधिकार होता है। बेटी का मां की संपति में भी हिस्सा होता है।

मैं  गंभीरतापूर्वक आशा और प्रार्थना करती हूं कि मेरी किसी भी साथी महिला को ऐसी परिस्थितियों से गुजरने और ऐसे प्रावधानों का उपयोग करने के लिये मजबूर न होना पड़े, लेकिन इन विषयों पर आपकी जानकारी शायद किसी दिन किसी अन्य को अनुविधाजनक स्थिति में पड़ने से रोकने में मदद कर सकती है और ऐसा होने पर हालातों का मुकाबला करने का मार्ग दिखा सकती है।


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Responses

  • M*****
    Mere mousa g ki cancer se August 2013 mein death ho gyi. Shaadi k kch mahine bad hi me mousi wps naani mama k pas a kr rehne lgi or mousa bi. Jb se wo 2no yha a kr rehne lge h tbse unhe kch bi ni diya kisi bi trh ki koi hlp ni ki. Kch samay se mousa g unke bade bhaiyo k sth hi unki chemist shop pr kam kr rhe the. Un logo ne bola tha hm tmko bi 1 rent pr shop dila dege pr wo ho ni paya qki mousa g bimar ho gye the. Unke jaane k bad mousi k in-laws ne kisi bi trh se financial hlp ni ki h mousi k bs 2 bete h. Un sbka hm hi kr rhe h 2no bacho ki education or jo bi needs hoti h wo sb mama , me papa or me baddi modi hi krte h. Mousa g k prnts bi ni h. So ab hm kaise or kya kre jisse ki mousi or 2no bacho ko unka ryt mil ske
  • T*****
    Agar kisi Ke pati ki deth ho gai ho or uski maa ki sarkari nokri ho or bahu ke paas ek beti ho or us bahu or uski bachi ko ghar se maar ke nikal diya ho or bahu ki sas ki ek beti or damad or uske do bache ho to sab Kuch nand nandoi or uske bachi ka hua kya sab Kuch bahu or uski bachi ko Kuch nahi milenge kya meri sas ki sarkari nokri hi unki selrry 60000hi pleases replying me
  • S*****
    Thankyou so much.aapne bahu ke liye rights bataye. esse phle enke bare me jankari nahi thi.veri-veri thanks......
  • M*****
    Give me ansr
  • M*****
    Mam talak k baad pati k kya duties h agr wo dusari shaddi nhi krti
  • R*****
    Good,,,thanks
  • S*****
    ,,,, good
  • P*****
    nice
  • A*****
    Jab Mai uska behaviour dekhti hu or puchti hu k sath rahna hai ya nai to kahta hai k rahna hai par Mai use kabi kuch na puchu na kuch kahu but jaldi see koi bat nai karta or Maine Shaadi k 4mahine bad hi use kisi ladki see bat karte pakda that tab b nai bataya or uska phn ek din 4bAje subh Aya jab wo apna phn bhul Gaye the or office Gaye the to mujhse maafi mangi or kaha k Mai dar gaya that isliye nai bataya but usk bad humari ladai inki mumy k Karan hoti rahi or inhine kabi b mujhe time nai Diya na Meri kabi parvah karte hai or ab phir wahi sab or kahti hu to apni mumy ki kasam b khate hai Mai Kya karu Mai unse pyar bahut karti hu but ab apne sath or galat nai hone Dena chahti Mai apni ijaat vapas pana chahti hu Kya karu plz some budy help me nai to apne baccho ko Mar k Mar jaugi help plZ
  • A*****
    Mujhe apne Ghar wall k same insult karta hai koi mujhe kuch b kahe kabi kuch nai Bolta Jo Mai kuch kahu to mujhse gussa karta hai Mai bhut pare shaan hu Mai chahti hu k Mai uska asli Roop usk gharwalo ko dikhu but kaise karuuska phn mi ka hai usme bhot see settings hai Maine ek bar us madam ka no pakad liya tha to mere husband needs kaha k Mera vaham hai magar won WhatsApp me kaise AA gaya jab Maine uska no delete KR Diya to
  • A*****
    Jab do sal pahle Maine dekha to lagaatar ek saal to to Inka har dum sath hi chalta the WhatsApp even rat ko b mere husband bahar mumy or Papa k sath Khana khate huye WhatsApp chalate the or ab trik lagate hai I feel it many time or Kai bar ink phn me dekha b hai ek ghante to aisa hi rahta hai AP WhatsApp on karo but not show online or not time change only blank at that time in my phn his WhatsApp shows blank or band Kar do to purana last seen hi show hota hai he make me fool or ab humesha mujhse ladai hi karta hai pura din nikal jata hai na hi phn karta hai na hi mere msgs padta hAi na reply karta hai na khud kabi msg karta hai
  • A*****
    Mere husband b mujhe cheat karte hai mujhe aisa Shaq hai kuk 9years ho Gaye humari shadi ko or won kabi b mujhse aj to khud pyar nai jatate phn me WhatsApp par Lage rahte hai or mere samne nai chalate koi trik laga rakhi hai jisse last seen change nai hota or jab online hote hai tab online show nai hota na hi last seen dikhta hai bus us jagah par kaafi der tk blank dikhta hai jab kuch kahti hu to mujhe marte hai or ladai karte hai or kahte hai saboot lao yadi kahti ho tounk office ki koi mam hai but wo Umar me badi b hai or sundr b nai hai but Mai Kya karu
  • J*****
    Mere sath bhi domestic violence during pregnancy huyi hai or is time mai apni mummy ke pass hu. Mere in law's ne mere sath maar peet kr ke mujhe ghar se nikal diya. Mujhe kya karna chahiye ?
  • S*****
    Sochiye is baat ke liye bhi
  • S*****
    Putravdhu ke liye kuch bhi solution nhi Hair Jahan putri ki baat aa gai wahi vasiyat hai ya nhi hai sab putri ka ho jayega putri buri hogi to Kuch putravadhu ko nhi milega
  • R*****
    Mere father in law mj dhamki dete h mai apni property m s bedhkhal kar dunga...mere husband k property m kuch b naam ni h....or mere husband mj akele chodne ki dhamki dete h....what's solution about this???
  • R*****
    Nice one and very well written. But mental torture is just limited to certain sequence. Which actually is much broader and can not and should not be limited to children.
  • P*****
    Very useful..faced all these things...but did nothing till now...
  • S*****
    Thanks Sheroes 🤗for sharing this useful information Now we know our rights as Wife, Daughter in law & daughter Now we'll fight for our rights & injustice
  • V*****
    Thanks for the information. It was very useful. Now I know my rights as a daughter in law.
  • N*****
    Nice
  • A*****
    Thanks for sharing very useful
  • P*****
    Really useful information
  • M*****
    Useful information... Thnx