भारत में डोमेस्टिक वायलेंस (घरेलू हिंसा)

Last updated 9 Aug 2020 . 1 min read



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यदि आप भारत में डोमेस्टिक वायलेंस की शिकार हैं या ऐसे किसी को जानती हैं जो घरेलू हिंसा का सामना कर रही है तो इस आर्टिकल से आपको यह समझने में आसानी होगी कि डोमेस्टिक वायलेंस क्या है और घरेलू हिंसा के खिलाफ खुद को कैसे सशक्त बनाया जाए; भारत में घरेलू हिंसा काउन्सलिंग, हेल्पलाइन और मदद कैसे पाया जाए?

क्या आप लॉकडाउन के दौरान डोमेस्टिक वायलेंस का सामना कर रही हैं? COVID-19 लॉकडाउन के दौरान हेल्पलाइन नंबर बहुत अधिक हो गए हैं, साथ ही घरेलू हिंसा के सिलसिले में हॉटलाइन पर मदद पाने के लिए महिलाओं का फोन करना बढ़ गया है।

यदि आप लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा के मुद्दे पर बात करना सुरक्षित नहीं महसूस करती हैं, लेकिन आपकी पहुंच स्मार्टफ़ोन तक है और आप चाहती हैं कि घरेलू हिंसा के लिए कोई महिला हेल्पलाइन नंबर हो, तो महिलाओं के लिए SHEROES ऐप डाउनलोड करके SHEROES चैट हेल्पलाइन पर बात कर सकती हैं। 

महिलाओं के लिए घरेलू हिंसा एक गंभीर खतरा है। एक अपमानजनक रिश्ते के संकेतों को जानना और उस स्थिति में किस तरह से प्रतिक्रिया करनी चाहिए, इसे जानना बहुत जरूरी है। 

भारत में डोमेस्टिक वायलेंस क्या है?

घरेलू हिंसा से निजात पाने के लिए पहला कदम घरेलू हिंसा के बारे में जानना है, घरेलू हिंसा के बारे में जागरूकता को बढ़ाना और घरेलू हिंसा को व्यापक तौर पर समझना कि यह क्या होता है।

भारत में घरेलू हिंसा क्या है?

घरेलू हिंसा पर काबू पाने के लिए पहला कदम घरेलू हिंसा के बारे में सीख रहा है, घरेलू हिंसा के बारे में जागरूकता बढ़ रही है और घरेलू दुरुपयोग के अर्थों को समझना और यह क्या होता है। घरेलू हिंसा केवल पति द्वारा नहीं की जाती है। घरेलू हिंसा या घरेलू दुर्व्यवहार उसे भी कहा जाता है, जो आपके माता-पिता, ससुराल और परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा भी किया जाए। 

घरेलू हिंसा (DV) के संकेत हमेशा स्पष्ट नहीं होते हैं और कई महिलाएं रिपोर्ट तक नहीं करती हैं कि उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है। कई बार तो महिला का अपना परिवार भी ऐसे समय में उनकी मदद नहीं करता है, क्योंकि इस तरह के मुद्दों से शर्म और अपराधबोध जुड़ा है।

घरेलू शोषण के प्रकार

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महिलाएं एक और चीज का सामना करती हैं, वह ये है कि क्या चीजें घरेलू हिंसा के तहत आती हैं और भारत में घरेलू हिंसा को कैसे साबित किया जा सकता है। कई तरह की घरेलू हिंसा होती है- शारीरिक शोषण (पिटाई), मानसिक शोषण या भावनात्मक शोषण और आर्थिक शोषण। 

सुस्मिता बर्मन के अनुसार, घरेलू हिंसा केवल गर्मागर्म बहस, शारीरिक शोषण या भावनात्मक उत्पीड़नके बारे में नहीं है। यह आर्थिक शोषण के बारे में भी है, जिसे हमारा समाज, परिवार के सदस्य, पुरुष सदस्य, पड़ोसी, रिश्तेदार, दोस्त और महिलाएं एवं लड़कियां इसे सामान्य समझते हैं। 

आर्थिक शोषण क्या है? जब एक शोषक पीड़िता के साझा या व्यक्तिगत संपत्ति तक उसकी पहुंच को नियंत्रित या सीमित करता है या अपने पावर का इस्तेमाल करते हुए पीड़िता की वर्तमान या भविष्य की कमाई की क्षमता को सीमित करता है, तो उसे आर्थिक शोषण कहा जाता है।

आर्थिक शोषण में, शोषक पीड़िता को अपने संसाधनों, अधिकारों और विकल्पों से अलग करता है, उसे आर्थिक तौर पर भी अलग कर देता है और पीड़िता और परिवार के अन्य सदस्यों को खुद पर निर्भर रहने को मजबूर करता है। 

डोमेस्टिक वायलेंस का पैटर्न

डोमेस्टिक वायलेंस का एक सामान्य पैटर्न या यूं कहें कि एक अलग चक्र होता है। आपके शोषक का बीच-  बीच में माफ़ी मांगना और प्यार  दिखाने से इस रिश्ते को छोड़ना और भी मुश्किल भरा हो  जाता है।

यह पैटर्न इस बात की पड़ताल करता है कि कम होते आत्मसम्मान, अलगाव, पारिवारिक दबाव और सामुदायिक समर्थन की कमी के बावजूद महिलाएं अपमानजनक रिश्ते को क्यों ढोती रहती हैं।

यह एक खराब होते रिश्ते के विभिन्न पड़ाव के बारे में बताता है। इसे समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि महिलाएं अकसर हिंसक व्यक्ति को क्यों नहीं छोड़ना चाहती हैं और यह स्वीकार करने से क्यों झिझकती हैं कि उनके साथ दुर्व्यवहार हो रहा है। 

द रिकवरी विलेज के अनुसार, यदि आप एक खराब रिश्ते में हैं, तो आपका यह सोचना बिलकुल सामान्य सी बात है कि इस रिश्ते से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है। लेकिन उस रिश्ते में रहने के खतरे छोड़ने से कहीं ज्यादा हो सकते हैं। डोमेस्टिक वायलेंस के खतरनाक माहौल में रहना आपकी जिंदगी को खतरे में डाल सकता है। 

इस रिश्ते में बने रहने से आपकी जिंदगी से जुड़े अन्य लोगों को भी खतरे में डाल सकता है। कई दफा ये लोग अपने रास्ते में आने वाले अन्य लोगों पर अपना गुस्सा निकाल देते हैं, खासकर बच्चों पर। शारीरिक उत्पीड़न के अलावा, इस सबसे जुड़े लोगों को डिप्रेशन सहित अन्य कई भावनात्मक चीजों से गुजरना पड़ सकता है। 

भारत में डोमेस्टिक वायलेंस के तथ्य

भारत में डोमेस्टिक वायलेंस और दुर्व्यवहार सिर्फ लोअर और मिडिल क्लास तक ही सीमित नहीं है। यह उच्च वर्ग और प्रसिद्ध लोगों में भी प्रचलित है। लेकिन, यहां महिलाओं के लिए उम्मीद है क्योंकि भारत में डोमेस्टिक वायलेंस और उत्पीड़न के खिलाफ कड़े कानून हैं।  डोमेस्टिक वायलेंस इंडिया कानून यहां की महिलाओं को बहुत पावर और अधिकार देता है।

और हां, हमेशा से ऐसी मौकापरस्त महिलाएं रही हैं, जो भारत के घरेलू हिंसा अधिनियम का दुरूपयोग करके लीगल सिस्टम का भी दुरूपयोग करती हैं। लेकिन कुछ लोगों द्वारा कानून के दुरूपयोग करने का मतलब यह बिलकुल नहीं है कि हमारे पास कानून नहीं होने चाहिए? भारत में पति द्वारा घरेलू हिंसा के आंकड़े बेहद भयावह हैं। 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NHFS-4) के अनुसार, 15 साल की उम्र के बाद से देश की हर तीसरी महिला को किसी न किसी तरह से घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा है। अमूमन इस हिंसा के अपराधी पति ही रहे हैं। 

सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि 31% विवाहित महिलाओं ने अपने जीवनसाथी द्वारा शारीरिक, यौन या भावनात्मक हिंसा का अनुभव किया है।  सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि 31% विवाहित महिलाओं ने अपने जीवनसाथी द्वारा शारीरिक, यौन या भावनात्मक हिंसा का अनुभव किया है। पति द्वारा की जाने वाली सबसे सामान्य प्रकार की हिंसा शारीरिक हिंसा (27%) है, इसके बाद भावनात्मक हिंसा (13%) का नंबर आता है।

सर्वे में भारत में घरेलू हिंसा के रूप में आर्थिक दुरुपयोग के बारे में नहीं बताया गया है, भले ही यह भारत में घरेलू हिंसा पीड़ितों के बीच एक जरूरी तथ्य है। भारत में घरेलू हिंसा के तथ्य वास्तव में डराने वाले हैं। एक्टर- डायरेक्टर नन्दिता दास ने लॉकडाउन के दौरान डोमेस्टिक वायलेंस के बढ़ते मामलों पर एक शॉर्ट फिल्म लिसन टू हर रिलीज की है, जिसमें उन्होंने और उनके बेटे ने काम किया है।

बॉम्बे हाई कोर्ट 2015 के फैसले का शुक्रिया, डोमेस्टिक वायलेंस के मामलों को अब कोर्ट से बाहर एनजीओ, काउंसलर और पुलिस की मदद से सुलझाया जा सकता है, जो एक महिला को परामर्श दे सकता है। "कार्रवाई के संबंध में वह अपने जीवनसाथी / पति या उसके परिवार के सदस्यों / ससुराल वालों के साथ संयुक्त परामर्श / मध्यस्थता मध्यस्थता ले सकती है। ”

गाइडलाइन्स में आगे कहा गया है कि उल्लंघन करने वाली महिला को अपने भविष्य के कार्यों को चुनने के अधिकार के बारे में बताया जाना चाहिए और घरेलू हिंसा अधिनियम से महिलाओं के संरक्षण के तहत उसे अपने कानूनी अधिकारों के बारे में निर्देशित किया जाना चाहिए।

डोमेस्टिक वायलेंस काउंसलर के साथ इंटरव्यू

टेलीविजन सीरीज, बिग लिटिल लाइज ने वायलेंस के चक्र को इस तरह से कवर किया है कि हर व्यक्ति मददगार काउंसलर की भूमिका को समझ सकता है, घरेलू हिंसा के पीड़ितों की मदद करता है।

Naaree.com ने Aks Foundation के कार्यकारी निदेशक और प्रमुख काउंसलर बरखा बजाज के साथ बात की, जो भारत में डोमेटिक वायलेंस की विशेषज्ञ हैं और पुणे में घरेलू हिंसा की स्थितियों से निपटने में महिलाओं की मदद करती हैं। इस इंटरव्यू में, उन्होंने भारत में घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए विकल्पों के बारे में बात किया है।

भारत में घरेलू हिंसा की समस्या कितनी गंभीर है?

यह काफी गंभीर है - हमारे पास 80% फोन घरेलू हिंसा के आते हैं। साथ ही, भारत में कई तरह के वायलेंस (हिंसा) को हिंसा के रूप में नहीं देखा जाता है। जैसा कि हमारे यहां पितृसत्ता है तो महिलाओं के खिलाफ हिंसा को सहज तौर पर स्वीकार किया जाता है।

घरेलू हिंसा की स्थिति में मदद के लिए फोन करने वाली महिलाओं के साथ आपका क्या अनुभव रहा है?

उन्हें मदद की बहुत ज्यादा जरूरत है।  वे खुद को दोष देती हैं, कंफ्यूज रहती हैं, अपराधबोध में भी रहती हैं और शर्मिन्दा भी रहती हैं क्योंकि वे अपने पार्टनर से प्यार करती हैं लेकिन उनसे तंग भी आ चुकी हैं। उनमें से कई असहाय और निराशाजनक महसूस करती हैं क्योंकि वे खुद को फंसा हुआ महसूस करती हैं।

Aks फाउंडेशन और अन्य संगठन ऐसी महिलाओं की किस तरह से मदद करते हैं? महिलाएं आपसे किस तरह के मदद की उम्मीद रख सकती हैं?

हम अपनी क्राइसिस फोन कॉल से 24/7 मदद के लिए तैयार हैं। पुणे में हम कानूनी सहायता और वकालत भी प्रदान करते हैं जहां हमारे वालंटियर्स घरेलू हिंसा से निकलकर आए लोगों के साथ अस्पताल या पुलिस स्टेशन भी जाते हैं।

एक लाइन घरेलू हिंसा काउंसलिंग के लिए अलग से है। यदि कॉल पुणे से बाहर का है तो हम अन्य एनजीओ के साथ भी बात करते हैं या भारत में अन्य डोमेस्टिक वायलेंस लीगल सर्विसेज की तलाश करते हैं।  

घरेलू हिंसा और दहेज की मांग से पीड़ित महिलाओं के लिए आपकी क्या सलाह है? ऐसी स्थिति का सामना करने पर उन्हें सबसे पहले क्या करना चाहिए?

यदि वे उस घर को छोड़ना चाहती हैं, तो हमारा कानून मजबूत है और उन्हें कानूनी चैनलों का उपयोग करना चाहिए। हालांकि, सबसे पहले उन लोगों को इस बारे में बताना चाहिए जिन पर वे भरोसा करती हैं और जिनसे उन्हें मदद मिल सकती है। इसे छिपाएं नहीं और सिर्फ अकेले बर्दाश्त न करें। 

कंट्रोल करने वाले पुरुषों के संकेतों और घरेलू हिंसा से पीड़ित लोगों के बारे में कैसे पता चल सकता है? क्या हम इस बात से पता कर सकते हैं कि उसके माता-पिता एक- दूसरे के साथ कैसा व्यवहार करते हैं?

कुछ संकेतों से इसका पता लगाया जा सकता है :

  • अत्यधिक जलन
  • अलग रहना
  • कंट्रोल करने की भावना- वह किससे मिलती है, क्या पहनती है
  • धमकी, डराना
  • भावनात्मक तौर पर कंट्रोल करना- आपको हर समय दोषी महसूस कराए।

महिलाएं यह सोचकर अकसर संकेतों को नजरअंदाज कर देती हैं कि वे शादी के बाद उस पुरुष को बदल सकती हैं। ऐसी महिलाओं से आप क्या कहना चाहेंगी?

हम केवल खुद को बदल सकते हैं और तब तक हम किसी को नहीं बदल सकते, जब तक वे खुद बदलना नहीं चाहतीं। किसी को बचाने और बदलने की कोशिश करना एक ऐसी लड़ाई है, जिसमें हम जीत नहीं सकते हैं। 

डोमेस्टिक वायलेंस से बचने के लिए महिला और उसके परिवार की मानसिकता में क्या बदलाव लाने की जरूरत है?

शिक्षा - जेंडर को लेकर समझदारी, जेंडर के बारे में आम तरीके से बात करना और जेंडर वायलेंस। इस सबको स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा होना चाहिए।

भारत में युवा अविवाहित महिलाओं को आप क्या सलाह देना चाहेंगी?

पावर और कंट्रोल के इशारों को समझें। डोमेस्टिक वायलेंस पावर और कंट्रोल के बारे में है, इसलिए जागरूक रहें। इसके अलावा, यदि आपको लग रहा है कि आपका निर्णय गलत है तो काउंसलिंग लें। साथ ही, आर्थिक स्वतंत्रता जरूरी है।

घरेलू हिंसा के खिलाफ खुद को कैसे करें सशक्त

मैंने अपने जीवन से यही सीखा है कि लोग आपके साथ वैसा ही व्यवहार करते हैं जैसा आप करने देते हैं और यह कि दूसरों के साथ आपका रिश्ता बिलकुल वैसा ही है, जैसा आपका अपने साथ है। 

खराब रिश्ते में रहने वाले हमेशा इसी ग़लतफ़हमी में रहते हैं कि उनका पार्टनर सुधर जाएगा। जबकि सच तो यह यही ऐसा नहीं होता!

  • झूठी उम्मीद में न रहें कि किसी दिन चीजें ठीक हो जाएंगी।
  • खुद को बचाने के लिए दूसरों की ओर न देखें।
  • अगर आप अपनी मदद नहीं कर सकती हैं तो कोई भी आपकी मदद नहीं कर सकता है।
  • केवल आप ही अपने लिए कार्रवाई कर सकते हैं - कानूनी और भावनात्मक रूप से।

एक एब्यूजिव पार्टनर इस तरह से माहौल बनाता है कि आप उससे बच नहीं सकते और उसके बिना रह भी नहीं सकते, क्योंकि वे आपको यही विश्वास दिलाना चाहते हैं ताकि आप पर उनका कंट्रोल बना रहे। 

तो आपको क्या करना चाहिए जब आपका पति आपको पीटे? आपको इस स्थिति से निकलने और भारत में एक अन्य डोमेस्टिक वायलेंस नंबर बनने से पहले आर्थिक, कानूनी और भावनात्मक मदद लेनी चाहिए।

घरेलू हिंसा से बचे लोगों के लिए आर्थिक सेल्फ- हेल्प (स्व- सहायता) गाइड

घरेलू हिंसा से बचे अधिकतर लोगों को खराब आर्थिक स्थिति का सामना करना पड़ता है, जो अकसर आपको अपने कंट्रोल में रखने के लिए एब्यूजर इस्तेमाल में लाता है। 

डोमेस्टिक वायलेंस से बचे लोगों के लिए इस आर्थिक सेल्फ- हेल्प गाइड में, आप अपने फाइनेंसियल डाक्यूमेंट्स को सुरक्षित रखने के तरीके, अपनी संपत्ति और उधार को सूचीबद्ध करने और अपने खुद के कुछ पैसे अलग रखने के तरीके जानने के आर्थिक सुझाव सीख पाएंगी।

डोमेस्टिक वायलेंस से बचे लोगों के लिए इमोशनल सेल्फ- केयर (भावनात्मक स्व-देखभाल)

किसी मेन्टल हेल्थ काउंसलर से कनेक्ट करें या SHEROES मेन्टल हेल्थ चैट हेल्पलाइन पर एक मैसेज छोड़ें, जहां आप अपनी लाइफ के किसी भी पर्सनल या प्रोफ़ेशनल चीज के बारे में बात कर सकती हैं। यहां आपकी बातचीत 100% गोपनीय और सुरक्षित है।

परिवार और समाज के विश्वास और सीमाओं को तोड़कर असहाय महसूस करने की अपनी आदत से छुटकारा पाना जरूरी है, जिसने आपको उस आजादी से अब तक दूर रखा है जिसकी आप हकदार हैं। 

भारत में घरेलू हिंसा से बचे लोगों के लिए कानूनी मदद

क्या आप घरेलू हिंसा के खिलाफ शिकायत दर्ज करना चाहती हैं? डोमेस्टिक वायलेंस की शिकार महिला को कैसे छुड़ाया जा सकता है? भारत में घरेलू हिंसा कानून क्या हैं? अगर आपको लगता है कि आप घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज करने के लिए पुलिस से संपर्क नहीं कर ससकती हैं  तो आपको वकील से सलाह लेनी चाहिए। 

यदि आप सोच रही हैं कि आप अपने एब्यूजर को भारत में घरेलू हिंसा की क्या सजा दे सकती हैं, तो मेरी यह सलाह है। यदि आप डोमेस्टिक वायलेंस का सामना कर रही हैं, तो अपना समय उन लोगों से "बदला" लेने की कोशिश में बर्बाद न करें जो आपको नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

यह एक निरर्थक और कभी न ख़त्म होने वाली यात्रा है और यह आपको और आपके अपनों पर बुरा प्रभाव छोड़ेगी।  इसके बजाय आप सिर्फ अपनी चीजें लें और अपने एवं अपने बच्चों के लिए एक नया जीवन जीने पर ध्यान दें। 

तलाक के बाद आप कितने पैसे या प्रॉपर्टी पाने की हकदार हैं, इसके लिए आप फाइनेंसियल लॉयर (वकील) से बात कर सकती हैं। लेकिन अपने दम पर आर्थिक आजादी की दिशा में काम करना सही रहता है।

घर से काम करने या फाइनेंसियल एडवाइजर करियर शुरू करने या अपना बिज़नेस बनाने से आपको अपना खोया हुआ आत्म-सम्मान और आत्मविश्वास को पाने में मदद मिलेगी।

आपको अपनी सारी एनर्जी खुद और अपने बच्चों को हेल्दी रखने में लगाना चाहिए, न कि अपने पार्टनर को सजा देने या उसके पास वापस जाने में। आगे बढ़ना और अपनी भावनाओं पर ध्यान देना अपने जीवन को वापस ट्रैक पर लाने का एकमात्र तरीका है।

सबसे अच्छा बदला अपने एब्यूजर के बिना एक सफल जीवन जीना है।


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Spardha Rani
नौ सालों का मेनस्ट्रीम प्रिंट मीडिया का अनुभव. उसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में फ्रीलांसिंग. 3 किताबों की अनुवादक भी.

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Responses

  • P*****
    Na lawyer kuch krta n or koi ....m bhot preshan hu...kisse hlp mangu...smjh nhi ata...konse hlp line number h.....1yr phle lga k dekhe lgte nhi
  • P*****
    @Spardha Rani ji Good morning 💜💜एकदम सटीक लेख और उसका सटीक विश्लेषण किया है आपने सही कहा शुक्रिया आपका 🍮🌹🌻❤सुबह की चाय के साथ ,कैसे हो आप💜💜
  • M*****
    Mam me bhi ye sb face kar rhi hu kya kru kuch samajh hi nhi aa raha mere husband drink karte h or mentally torchar karte har baat ka dosh mujhe hi dete karte khud h bolte h tere bajah se aisa huaa kabhi bevajah bachcho par hath uthate h kabhi mujhse bolege tujhe mar duga or bachcho ko bhi or khud bhi mar jauga kabhi bolte h atam hatya kruga hath uthana chillachot karna galigloch karna bachcho ke samne kabhi apne ghar balo ke khilaf bolna kabhi unki sath ho jate h mam ghar bale bhi unki hi tarf se bolte h vo or unke ghar bale ye chahte h ki me bina kuch mage bina kuch bole chup chap unka or unke ghar balo ka kam karti rhu mam khusa bhi khelte h har gaye to teri bajh se mam sb kuch bech diya unhone mere sadhi ke jevar bhi kuch kaho ki kyu pite ho to bolte h ye meri life istail h agr me pese magu to nhi h or koi kam bhi nhi karte kabhi itne pyar se bat karte h kuch samjh hi nhi aata or normal ho to sb thik h
  • A*****
    Mai bhi ye sab jhel chuki hu khud apne husband aur sasural walo se
  • D*****
    Mere sath bhi hua h ye sab mne womens help line m kase kiya or ab sasural aa gye abi mere sath mar pet hote h husband bolte h ki tu jail hi kargye m jail chala guga ab m kya karu kya cort kase karu
  • S*****
    हमारा अपना देश का कानून बहुत कमज़ोर है मैंने खुद केस किया है दो साल हो गया कोई सुनवाई नहीं हुआ ना केस आगे बढ़ और नाही मैं डाइवोर्स ले पाई कोई फायदा नहीं है हमारा कानून कमज़ोर है और अभी इस Corona के समय में सब कोर्ट का काम बंद है। जिसके साथ होता है उसे पता है की वह कैसे रोज इस तकलीफ से गुजरता है और सब बेबुनियाद है कोई मदद नहीं मिलता यह अपने आप की लड़ाई है आपको अपने जिन्दगी में आगे बढ़ना है तो काम किजिए अपने खुद के बलबूते आगे बढ़िए समय लगेगा पर यहीं आपको आगे बढ़ने में मदद करेगा जितना हो सके नया काम सीखिए और सबके साथ आगे बढ़िए
  • A*****
    Mahila helpline se hlp mangne par madam ne ulda muje hi galat bola,,aisi h india mahila help line,,ye log sahi se insaaf nahi karte ,,mahila ko insaaf milega aisi baaten sirf likhawat me or bolne me hi rehti h hakikat me nai😔
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    Kya physical voilence kya mentally torture zyda hota hai mujhe pe
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  • M*****
    मैडम हमारे देश में महिलाओं के हक के लिए काफी कानून बनाया गया है लेकिन वह सिर्फ कहने के लिए हैं इसके अलावा कुछ भी नहीं है
  • S*****
    Bahut informativevhai ye Aur jo likha hai wo bhi satya hai
  • A*****
    Behad mahtavpoorna jaankari .jagrukta hi Kai baar sahi faisla lene me madad kar sakti hai. Bahut achcha article 👌
  • M*****
    So informative article Spardha ji...🥰
  • A*****
    Bahut badhiya
  • P*****
    Superb, ********************
  • N*****
    Bdhiya post
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